Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
इन्द्राश्मजालकुसुमाश्चिन्तामणिगुलुच्छकाः ।
कल्पवृक्षा इमे पक्वफलस्तबकदन्तुराः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
इन्द्रनील मणियाँ ही जिनके फूल हैं,
चिन्तामणिर्यो जिनके कलियों के गुच्छे हैं तथा पके हुए फलों के गुच्छं से लदे हुए ये कल्पवृक्ष हैं