Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
इह तावदिमं शक्रमहमासनसंस्थितम् ।
द्वितीयमिव त्रैलोक्यस्रष्टारमभिवादये ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
यहाँ पर सिंहासन पर विराजमान इन देवराज इन्द्र को, जो दूसरे त्रिलोकी स्रष्टा के (ब्रह्मा के) तुल्य हैँ,
भँ अभिवादन करता हूँ