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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

अथ तत्रोपविश्यासौ भार्गवः शोभिताननः । श्रियं जहार शशिनः सकलस्यामलस्य च ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त सुन्दर मुखकमलवाले श्री शुक्राचार्यजी ने वहाँ पर बैठकर सोलहों कलाओं से युक्त निर्मल चन्द्रमा की शोभा को हर लिया