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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

धन्यस्त्वदागमे नाथ स्वर्गोऽयं शुक्र शोभते । उष्यतां चिरमेवेह शक्र इत्थमुवाच तम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीशुक्राचार्य, यह स्वर्ग आपके शुभागमन से धन्य होकर सुशोभित हो रहा है, हे प्रभो, आप चिरकाल तक यहाँ निवास कीजिये, - यों शुक्राचार्य से इन्द्र ने स्वर्ग में रहने का अनुरोध किया