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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

अथ सादरमुत्थाय शुक्रः शक्रेण पूजितः । गृहीतहस्त आनीय समीपमुपवेशितः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त इन्द्र ने सिंहासन से उठकर शुक्राचार्य का आदसपूर्वक पूजन किया । उनका हाथ पकड़कर उन्हें अपने समीप मेँ लाकर वैठाया