Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
इमास्ता लोचनोल्लासदृष्टनीलाब्जदृष्टयः ।
मुग्धहासविलासिन्यः कान्ता हरिणदृष्टयः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रत्यक्ष देखे गये नीलकमल के तुल्य जिनकी दृष्टियाँ है, मनोहर हास से विभूषित
लतारहित शावाक्षी ये वे कान्तार हैं