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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

इमे ते कौसुमोद्योता अन्योन्यप्रतिबिम्बिताः । विश्वरूपोपमाकारा मरुतो मत्तकाशिनः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

फूलों से बनाई गई मालाओं से जगमगा रहे, परस्पर एक दूसरे मेँ प्रतिबिम्बित अतएव विश्वरूप सर्वाकार भगवान हरि के आकार के सदुश तथा खूब सन्तुष्ट ओर दीप्तिमान ये देववृन्द हैं