Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
संभवन्तीह पुरुषा राम राजससात्त्विकाः ।
प्रविचार्य समायाता मन्तव्यं चेह तद्धिया ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
तब कौन उत्पन्न होते हैं ? ऐसा प्रश्न होने पर उन्हे कहते है ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, राजस-साप्विक पुरुष यहाँ पर उत्पन्न होते हे ।
शंका : केवल सात्विक के पुनर्जन्म न होने में क्या कारण है ?
समाधान : केवल सात्त्विक पुरुष पूर्वजन्म में भी आत्मतत्त्व का श्रवण, मनन आदि उपायों से
विचार कर केवल प्रतिबन्ध के क्षय के लिए प्रतिबन्धक्षययोग्य जन्म को प्राप्त हुए हैं। इस जन्म में भी
उनकी बुद्धि से सदा आत्मतत्त्व ही मननीय है, इसलिए उनका पुनर्जन्म नहीं होता है