Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
प्राधान्येन समायाता ये यदा परमात्मनः ।
दुर्लभाः पुरुषा राम ते महागुणशालिनः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव वे दुर्लभ हैं, ऐसा कहते हैं।
जो जब परमात्मा से नर और सुर के अनीक की अपेक्षा प्रधानता से प्राप्त हुए हैं, हे श्रीरामचन्द्रजी,
वे महागुणशाली पुरुष दुर्लभ हैं