Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
ये चान्ये विविधा मूढा मूकास्तामसजातयः ।
तेषां स्थावरतुल्यानां किंच राम विचार्यते ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो प्रजापति, सुर, और मनुष्य के अनीक से अन्य राक्षस, पिशाच, पशु-पक्षी आदि हैं वे पेड,
पत्थर के तुल्य हैं, ज्ञानाधिकार की चर्चा में उनकी योग्यता ही नहीं है, इसलिए उनका उल्लेख नहीं
किया है, ऐसा कहते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, जो और विविध प्रकार के तामस जातिवाले मूढ, मूक जीव हैँ, वे सब स्थावर
पेड, पत्थरों के समान हैं, उनका क्या विचार किया जाय ?