Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
कतिपया न गता भवभावनां नरसुराः प्रकृतक्रमजन्मनि ।
अहमिव प्रविचारणयोग्यतामनुगतो ननु राजससात्त्विकः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वज्ञान की दुर्लभता का ही उपपादन करते हैं।
क्रम से प्राप्त उत्तम जन्म में भी कुछ ही नर और सुर सांसारिक भोगरुचि को प्राप्त नहीं हुए हैं, अतः
वैराम्य अत्यन्त दुर्लभ हे । उन लोगों में मेरे तुल्य जन्म से लेकर शम, दम आदि सब गुणों की सम्पत्ति से
खूब आत्मविचार योग्यता को प्राप्त हुए भी कुछ लोग निरन्तर समाधि सुख में विघ्नभूत राजकुलपौरोहित्य
के कारण कुछ राजसयुक्त सात्विक ही है, शुद्ध सात्विक नहीं हैं | (यह शुद्ध सात्विकता की अति
दुर्लभता के सूचन के लिए निरभिमानतावश अतिशयोक्ति है)