Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
दिनं तन्मात्रवातेन तत्प्राणात्मतया यथा ।
आक्रम्यन्ते प्रचण्डेन दैत्यौघेनामरा इव ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर तेज, जल और पृथ्वी की उत्पत्ति हो जाने पर प्रकाश को प्राप्त करके वे जीव शब्द, स्पर्श,
रूप, रस और गन्धरूप तन्मात्राओं के सहित पूर्वोक्त वायु से और अपने उपभोग के हेतु अमुख्य ओर
मुख्य दो प्रकार के प्राणवायु से ऐसे आक्रांत होते हैं, जैसे कि प्रचण्ड दैत्यों के समूह से देवता आक्रान्त
होते हैं