Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
भूताकाशं विशन्त्येते धूमश्रीरिव चाम्बुदम् ।
एकतां यान्ति जीवौघा ब्रह्मण्याकाशमारुतैः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे प्रकाश की शोभा मेघ में
प्रविष्ट होती है वैसे ही ये जीवसमूह भूताकाश में प्रवेश करते हैं। जैसे दूध और जल एकता को प्राप्त
होते हैं वैसे ही ये जीवसमूह अध्यस्त आकाश और वायु के साथ ब्रह्म में एकता को प्राप्त होते हैं