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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

राम ब्रह्मणि जीवौघास्तरङ्गा इव वारिधौ । अनाद्यन्तपदोत्पन्नाः कलनापदमागताः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, अनादि अनन्त ब्रह्मरूपी पद से उत्पन्न हुए यानी कल्पना को प्राप्त हुए ये जीवसमूह समुद्र में तरंगों की भाँति ब्रह्म में स्थित हैं