Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
ततो जगति जायन्ते भवन्ति प्राणिनोऽस्फुटाः ।
अन्या धूमादिमाजाता राम जीवपरम्परा ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जगत में पैदा होते हैं और अनभिव्यक्त ज्ञानैश्वर्यवाले प्राणी होते हैं।
तीसरे दल की सृष्टि का क्रम कह कर दूसरे दल की सृष्टि का क्रम कहते हैं।
अन्य कुछ इष्टापूर्तकारी (यज्ञ, कुएँ और बावड़ियाँ खुदवाना आदि कर्म) जीवराशियाँ श्रद्धापूर्वक
अग्निमें दी गई आहुति से यानी तज्जन्य अपूर्वं से परिवेष्टित होकर धुएँ के द्वारा सूर्यमण्डल में पहुँच कर
सूर्य की किरणों द्वारा चन्द्रमण्डल में प्रवेश करने से धुम्र आदि मार्ग में प्रविष्ट हुई हैं। उन जीवपरम्पराओं
का भी लिंगदेह प्राप्तिपर्यन्त क्रम पूर्वोक्त ही है