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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 61, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

शरीरमस्थिरमपि संत्यक्त्वा घनशोभनम् । वीतमुक्तावलीतन्तुं चिन्मात्रमवलोकयेत् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

सत्य का ही अवलोकन करना चाहिये, ऐसा जो कहा उसमें उपाय कहते हैं। अस्थिर शरीर का और अहंकार का भी त्यागकर अत्यन्त कल्याणकारी, जिसने मोती की माला को व्याप्त कर रक्खा है, ऐसा मोती-माला के अन्तर्गत सूत के समान सब देह, अहंकार आदि के अन्तर्गत चिन्मात्र का ही अवलोकन करना चाहिए