Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 61, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
तस्मिन्पदे नित्यतते सर्वगे सर्वभाविते ।
शिवे सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा यथा ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे