Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 61, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
यैव चिद्भुवनाभोगे भूषणे व्योम्नि भास्करे ।
धराविवरकोशस्थे सैव चित्कीटकोदरे ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो चित् विशाल भुवन के भूषणरूप आकाश में स्थित सूर्य में हे, वही चित् पृथिवी के विवर के
मध्य में स्थित कीड़े में भी हे