Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 61, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
नच तन्नाम वस्त्वस्ति यद्भूत्वा संप्रलीयते ।
आभासमात्रमेवेदं न सन्नासच्च राघव ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
तब शास्त्रीय बुद्धि कैसी है ? ऐसा प्रश्न होने पर उसे कहते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, जो उत्पन्न होकर विलीन हो जाती है, वह वस्तु नहीं है। वह आभासमात्र है, न
वह सत् है और न असत् है