Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 61, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
उद्भूतेनाप्रशान्तेन चेतसा सपदि स्थितम् ।
नेह मोहान्त आमोक्षान्नेदं यत्तदवस्तु च ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह न सत् है और न असत् है, ऐसा जो कहा, उसका उपपादन करते हैं।
चूँकि मोक्ष होने के पहले अभिव्यक्त ओर अशान्त चित्त सा भली-भाँति गृहीत हो रहा यह जगत
अपने स्थिति काल में विद्यमान है, अतः असत् नहीं है। मोह की निवृत्ति होने पर तो मोक्षप्राप्ति से पहले
भी जो यह है ही नहीं तो मोक्षकाल में यह सुतरां नहीं है, अतः सत् भी नहीं है