Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 61, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
असति जगति किं किलेह मोदः सति च किमङ्ग विमोहकारणं तत् ।
जननमरणसंस्थितिष्वतस्त्वं भव खमिवातिसमः सदोपशान्तः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि जगत असत् है, तो यहाँ पर मोह कैसे यदि वह
सत् है, तो मोह का कारण कैसे ? इसलिए सदा शान्त हुए आप जन्म, मरण और स्थितिरूप संसार में
आकाश के समान समदृष्टि होइए