Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
प्राक्तनानखिलान्भावान्यान्ति कर्मवशं गताः ।
पौरुषेणावजीयन्ते धराधरमहाकुलाः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
कमरधीनता को प्राप्त हुए जीव पुर्वजन्म के सब भावों को प्राप्त होते हैं, राजा
की सेनाओं को ओर पर्वतं के वनों को क्रमशः नीतिशास्त्र के अनुसार पराक्रम से ओर काटने आदि से
लोग जीत लेते हैं, इसलिए अधम पुरुष को भी मोक्ष के लिए ही अवश्य प्रयत्न करना चाहिए । जो पुरुष
पौरुष से विरत नहीं होता, उसे फल सिद्धि अवश्यप्राप्त होती है, यह अभिप्राय है