Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verses 29–30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verses 29–30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 29,30
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हिन्दी अर्थ
हे सभ्यगण, हे महाराज दशरथ, हे श्रीरामजी, हे लक्ष्मण तथा अन्यान्य नृपवर्ग आप
सभी आज अपने-अपने आहिक कर्मो का (संध्या वंदन का) अनुष्ठान करें, क्योकि प्रायः आज का
दिन समाप्त होने जा रहा है, अब जो अवशिष्ट विचार हे, उसका, जब आप प्रातःकाल सभा में आयेंगे,
तब हम लोग विचार करेगे