Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 28
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हिन्दी अर्थ
हे भद्र, मेरे द्वारा कथित अर्थ की सिद्धि के लिए आपको असंग होकर यथा प्राप्त
यानी समयानुसार प्राप्त हुए व्यवहार का परिपालन करना चाहिए, समस्त शास्त्रों के परम तात्पर्यविषय
सिद्धान्त का मन में दृढ़ीकरण करके आप उदारवान यानी अपरिच्छिन्न आत्मबोध से सम्पन्न हो
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