Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 27
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र, जैसे दीपक को त्यागनेवाला तथा अन्धपुरुष रात्रि में गर्त में
गिर जाता है, वैसे ही बुद्धि से गृहीत मेरे अर्थ के अनुसार कार्य नहीं करोगे तो अवश्य ही आप नीचे गर्त
में गिर जाओगे