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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 26

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, इस बुद्धि से (वृत्ति से) विहार कर रहे आप कभी भी बद्ध नहीं होंगे । यदि इस वृत्ति का परित्याग कर आप अन्य मार्ग से व्यवहार करेगे, तो उस प्रकार आपका अधःपतन हो जायेगा, जिस प्रकार विन्ध्याद्रि के गर्त में हाथी का अधःपतन होता है