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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verses 34–35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verses 34–35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 34,35

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अन्यान्य राजाओं ने महाराज दशरथ की स्तुति की, श्रीरामचन्द्रजी को नमस्कार किया तथा महर्षि वसिष्ठजी की खूब स्तुति की, अनन्तर वे अपने-अपने आश्रम में चले गये ॥ ३ २॥ आकाशचारी देवताओं से वंदन किये हुए महाराज वसिष्ठजी विश्वामित्र महर्षि के साथ आश्रम जाने के लिए आसन से उठे ॥ ३ ३॥ दशरथ आदि राजे तथा मुनि लोग अपने अनुरूप उपदेष्टा मुनि वसिष्ठजी के पीछे-पीछे आश्रम पर्यन्त जाकर उनकी आज्ञा लेकर कोई आकाश की ओर, कोई अरण्य की ओर, कोई राजमन्दिर की ओर कमल से उत्थिर भ्रमरो की तरह चले गये