Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 36
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हिन्दी अर्थ
महर्षि वसिष्ठजी के चरणों में निर्मल पुष्पों की अंजलि समर्पण करके महाराज दशरथजी,
भार्याओं से अनुगत हो, अपने राजमहल के भीतर प्रविष्ट हुए