Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 38
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हिन्दी अर्थ
अपने स्थान में आकर उन सब श्रोताओं ने स्नान किया, देवता ओर पितरो की पूजा की
तथा विप्र ओर अतिथियों के अभिमुख हुए यानी अभिगमन आदि से पूजन के लिए उनका स्वागत
किया