Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
नूनमुत्सर्जिताभ्रेण शरद्व्योम्ना समो भवान् ।
भव भावनया मुक्तो युक्त उत्तमसंविदा ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अब श्रीरामचन्द्रजी में ज्ञान से जीवन्मुक्तता की सम्भावना करते हुए कहते हैं।
सचमुच आप जिससे मेघ हट गये हों, ऐसे शरद् ऋतु के आकाश के तुल्य हैं। उत्तम ज्ञान से युक्त
आप भावना से युक्त होइए