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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

त्वमुदारनिजाचारो धीरो गुणगणाकरः । अधितिष्ठसि निर्दुःखं वीतसर्गमनोमलः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्तगुण आप में हैं ही, ऐसा कहते है । हे श्रीरामचन्द्रजी, आप बाह्य ओर आभ्यन्तर दरनदरों को सहन करने वाले, एवं विविधगुणों के आगार हैं, आपका आचार उत्तम है तथा आपके मन के सभी मल दूर हो गये है; अतः आप दुःखरहित परम पद में स्थित हैं