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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

शास्त्रार्थसुजनासङ्गवैराग्याभ्याससत्कृतः । पुरुषस्त्वमिवाभाति निजविज्ञानभाजनम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

वेदान्त में उपयोगी अन्यान्य शास्त्रों के, सत्कर्म, सदाचार आदि के ओर सज्जनों की संगति, वैराग्य आदि के निरन्तर अभ्यास से संस्कृत हुआ पुरुष प्रत्यकृतत्त्व विषयक आत्मज्ञान का भाजन होकर आपके समान शोभित होता है