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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

सुजनेम वितृण्णेन विदुषा महता सह । प्रविचार्य महायोगात्पदमासाद्यते परम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

उत्तम कुल में उत्पन्न हुए, विषयतृष्णा शून्य, तत्त्वज्ञानी महापुरुष के साथ शास्त्र का विचारकर मन का नाश करनेवाली समाधि से परम पद प्राप्त किया जाता है