Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 7, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
सर्वाङ्गं विवशीकृत्य कामायैव समर्पिता ।
पेतुः स्मरशरास्तस्या मृदुष्वङ्गेषु भूरिशः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे
कमलिनी के पत्तों पर मेघो की धाराएँ गिरती है वैसे ही उसके कोमल अंगो पर काम के एक-आध नहीं
अनेकों बाण गिरे