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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 7, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

आजगाम भृगोः पुत्रं मयूरी वारिदं यथा । धवलागारमध्यस्थे पर्यङ्के परिकल्पिते ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे श्रीविष्णु भगवान क्षीरसागर में प्रवेश करते हैं वैसे ही शुभ्रभवन के मध्य में स्थित सजे-सजाये पलंग पर भार्गव ने प्रवेश किया