Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 7, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
यथा परस्परानन्दः स्नेहः प्रथमरक्तयोः ।
त्वत्पादस्पर्शनेनेयं समाश्वस्तास्मि मानद ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सम्मान करनेवाले शुक्राचार्यजी, जैसे रात्रि मे चन्द्रमा की किरणों से संस्पृष्ट कमलिनी
विकास को प्राप्त होती हे वैसे ही आपके चरणों से स्पर्श से यह मैं आश्वासन को प्राप्त हुई हूँ