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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 7, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

स्वःश्रियं स समालोक्य लोललोचनवाञ्छिताम् । स्त्रैणं द्रष्टुं जगामासौ नलिनीमिव सारसः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

स्वर्ग की शोभा को ओर अपनी सुन्दरता को स्त्रीजनो की अत्यन्त अभीष्ट जानकर जैसे सारस कमलिनी को बेधने के लिए जाता हे वैसे ही वे अप्सराओं के समूह को देखने के लिए गये