Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 8, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
संशीर्णयोर्देहकयोश्चित्तके व्यसनाविले ।
विचेरतुस्तयोर्व्योम्नि निर्नीडौ विहगौ यथा ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उन दोनों के खण्ड-खण्ड हुए दो शरीरों के लिंग शरीर दुःख से मलिन होकर जिनके घोंसले
नष्ट हो गये हों, ऐसे पक्षियों के तुल्य आकाश में घूमने लगे