Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 8, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तत्राविविशतुश्चान्द्रं ते चित्ते रश्मिजालकम् ।
प्रालेयतामुपेत्याशु शालितामथ जग्मतुः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश में वे दो लिंग शरीर चन्द्रमा
की किरणों में प्रविष्ट हुए। तदनन्तर तुरन्त ओस की बूँद बनकर धान के रूप में परिणत हो गये