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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verses 2–3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 8, verses 2–3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 2, 3

संस्कृत श्लोक

मन्दारमालाकलया विबुधासवमत्तया । तदा तेन तया सार्धं द्वितीयेनामलेन्दुना ॥ २ ॥ विहृतं मत्तहंसासु हेमपङ्कजिनीषु च । तटीष्वमरवाहिन्याः सह चारणकिंनरैः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

मन्दार के फूलों की मालाओं से लदी हुई तथा देवताओं के उपभोग योग्य अमृत या मदिरा से मस्त हुई उस अप्सरा के साथ दूसरे निर्मल चन्द्रमा के तुल्य उक्त शुक्राचार्य ने मन्दाकिनी के तटों पर, जिनमें मदोन्मत्त हंस भ्रमण करते थे ओर सोने के कमल खिले थे, चारण और किन्नरों के साथ विहार किया