Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 8, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । इति चित्तविलासेन चिरमुत्प्रेक्षितैः प्रियैः । प्रणयैर्भार्गवस्यासीत्तुष्टये सुसमागमः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्टजी ने कहा : वत्स श्री रामचन्द्रजी, इस प्रकार चित्त के विलास से चिरकाल तक कल्पित प्रिय प्रणयं से अप्सरा का सुन्दर समागम श्री शुक्राचार्यजी की मनस्तुष्टि के लिए हुआ

सर्ग सन्दर्भ

सातवाँ सर्ग समाप्त आठवाँ सर्ग स्वर्गीय विविध सुखो के भोग के अनन्तर भूलोक में आये हुए शुक्र का वासनावश अनेक जन्मों का तथा तपस्विता का वर्णन |