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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 30

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 7, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

तौ दम्पती तत्र विलासकान्ती विवेशतुस्तासु वनस्थलीषु । किञ्जल्कगौरानिलघूर्णितासु रक्तौ द्विरेफाविव पद्मिनीषु ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे केसर से पीले हुए वायु से कम्पित पद्यिनी में परस्पर अनुरक्त भँवरी ओर भँवर प्रवेश करते हैं वैसे ही हावभाव आदि विलासं से अधिक कान्तिवाले वे दम्पती उन वनस्थलिया में प्रविष्ट हुए