Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 8, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
विविधजन्मदशां विविधाशयः समनुभूय शरीरपरम्पराः ।
सुखमतिष्ठदसौ भृगुनन्दनो वरनदीसुतटे दृढवृक्षवत् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
वह पूर्वोक्त शुक्राचार्य नाना प्रकार की वासनाओं से
वासित होकर उन वासना ओं के अनुसार प्राप्त होनेवाली विविध जन्म दशाओं को प्राप्त कर, शरीर
परम्पराओं का भलीभाँति अनुभव कर भाग्यवश प्राप्त हुई वैराम्य आदि की साधन सम्पत्ति से समंगा
नाम की बड़ी नदी के सुन्दरतट पर विक्षेपशून्य हो, दृढ़ वृक्ष के समान यानी छेदन, भेदन आदि हजारों
विक्षेप होने पर भी अचल रहने वाले वृक्ष के तुल्य स्थित रहा