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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 8, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

बालहेमलताजालजटालासु नदीषु च । भ्रान्तमुन्मत्तनागेन मैरवीष्वज्जिनीष्विव ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

नूतन -नूतन सुवर्ण की लताओं से व्याप्त सुमेरू पर्वत की नदियों ओर भूमियों मे उसने इस प्रकार भ्रमण किया जिस प्रकार कि उन्मत्त हाथी कमलों से भरे हुए तालाब मेँ भ्रमण करते हैं