Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 8, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
नन्दनोपवनाभोगो मन्दरेणेव वारिधिः ।
भृशमालोड्यतां नीतः प्रथमैः सह शाम्भवैः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे
मन्दराचल समुद्र मे अवलोडन करता है वैसे ही उसने श्री शिवजी के पार्षदो के साथ नन्दनवन के एक
छोर से दूसरे छोर तक खूब परिभ्रमण किया