Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 9, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 9, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
तापोपतप्ता संसिक्ता वर्षाजलभरेण सा ।
प्रागनुस्मरणोल्लासमिव वाष्पं विमुञ्चति ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
पहले सूर्य संताप से तपाया गया, ताप से तपने के बाद वर्षाऋतु
की मूसलाधार वृष्टि से सींचा गया वह शरीर मानों अपने बन्धुरूप पूर्व पूर्व शरीरो की परम्परा के स्मरण
से उत्पन्न हुए दुःख से या आनन्द से बढनेवाले बाष्प को छोडता था