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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 9, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 9, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

दर्शयन्ती जगच्छून्यं वपुरक्ष्णोरकृत्रिमम् । मुखारण्यजरत्कूपरूपया गर्तशोभया ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

वह शरीर मुखमण्डलरूपी अरण्य में पुराने अंधे कुओं के तुल्य नाक, आँख, मुँह आदि के गङ्ख की शोभा से जगत की स्वाभाविक असद्रूपता को (शून्यता को) विवेकी पुरुषों के चर्मचक्षुओं के सामने दर्शाता हुआ-सा स्थित था