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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 9, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 9, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

मनोवराकमवटे लुठितं भवभूमिषु । हसतीवेति शुभ्राभ्रसितया दन्तमालया ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

वह शरीर संसार भूमिय में भोगाशारूपी गड मे पूर्वोक्त रीति से गिरे हुए बेचारे मन का सफेद मेघों के सदृश सफेद दन्तपंक्ति से मानों उपहास करता था