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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 9, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 9, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

रागद्वेषविहीनत्वात्तस्य पुण्याश्रमस्य तु । महातपस्त्वाच्च भृगोर्न भुक्ता मृगपक्षिभिः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

उस पवित्र आश्रम में रागद्वेष की कहीं गन्ध भी न थी और महर्षि भृगुजी महातपस्वी थे, अतएव शुक्राचार्य के शरीर को मांसाहारी पशु-पक्षियों ने नहीं खाया