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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 9, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 9, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

अथ कालेन महता पवनातपजर्जरः । कायस्तस्य पपातोर्व्यां छिन्नमूल इव द्रुमः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके अनन्तर अधिक समय बीतने के कारण वायु और धूप से जर्जरित हुआ शुक्राचार्य का शरीर, जिसकी जड कट गई हो, ऐसे वृक्ष के तुल्य, पृथिवी पर गिर पड़ा